
सोलन। सोलन शहर की अधिष्ठात्री देवी मां शूलिनी है। भगवती शूलिनी की अराध्य भूमि होने के कारण ही शूलिनी से सोलन, अंतत: सोलन शब्द की व्युत्पत्ति हुई। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार भगवती का प्रादुर्भाव होने पर, दुष्ट प्रवृत्तियों और राक्षसों का संहार करने के लिए समस्त देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र शस्त्र प्रदान किए थे।
वहीं पिनाकधारी भगवान शंकर ने अपने त्रिशूल से एक शूल निकालकर भगवती को प्रदान किया। त्रिशूलधारिणी दुर्गा ने इसी त्रिशूल दुर्गा से असुरों का संहार किया था। अपने दिव्य प्रभाव के कारण भगवती मां का शूलिनी नाम प्रख्यात हो गया। जनश्रुति के अनुसार बघाट नरेश ने जब यहां राजधानी स्थापित की थी, उस समय सुयोग्य संतान प्राप्ति, अखंड कीर्ति और सर्वसुख प्राप्ति के हेतु प्रजा की अधिष्ठात्री देवी के रूप में शूलिनी की स्थापना की थी। सोलनवासियों के लिए आज गौरव का दिन है। मां शूलिनी की पालकी आज निकलेगी। मां के सच्चे भक्त व मानवता प्रेमी श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन है कि इस पावन पर्व की गरिमा का ध्यान सुशासन, स्वच्छता, पारस्परिक सहयोग में अपना योगदान प्रदान कर अवश्य रखें।
बड़ी बहन के आतिथ्य पर मां शूलिनी
सोलन। आषाढ़ मास के इस पावन पर्व पर मां शूलिनी अपनी बड़ी बहन के आतिथ्य पर तीन दिनों के प्रवास पर निकलेंगी। इस पावन अवसर पर संपूर्ण जनपद का अपार जनसमूह, श्रद्धा हर्षोल्लास के साथ मां का स्वागत करेगा। विभिन्न वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों पर अहर्निश झूमते लोग तीन दिनों तक मां की स्तुति करेंगे। शहर के चप्पे-चप्पे में मां के पधारने पर प्रसाद स्वरूप अनेकों स्वादिष्ट व्यंजनों का निशुल्क वितरण। जो दूर से आए श्रद्धालुओं की प्यास, भूख व थकान को मां के आशीर्वाद के साथ दूर करता है।
